भारत सबसे आगे ट्विटर पर मीडिया संस्थानों, पत्रकारों के ट्वीट हटवाने के मामले में

www.atalhind.com30 July 202210 min read0 viewsदिल्ली

भारत सबसे आगे ट्विटर पर मीडिया संस्थानों, पत्रकारों के ट्वीट हटवाने के मामले में


नई दिल्ली: जुलाई से दिसंबर 2021 के बीच वैश्विक स्तर पर भारत ने ट्विटर पर सत्यापित पत्रकारों और मीडिया संस्थानों द्वारा पोस्ट की गई सामग्री को हटाने की कानूनी मांग सबसे ज्यादा की. ट्विटर ने अपनी हालिया पारदर्शिता रिपोर्ट में यह जानकारी दी.

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्विटर खातों से जुड़ी जानकारी मांगने में भारत सिर्फ अमेरिका से पीछे था. वैश्विक स्तर पर मांगी गई जानकारी में उसकी हिस्सेदारी 19 फीसदी थी.

रिपोर्ट के अनुसार, भारत जुलाई से दिसंबर 2021 के बीच सभी तरह के उपयोगकर्ताओं के मामले में सामग्री को प्रतिबंधित करने का आदेश देने वाले शीर्ष पांच देशों में शामिल था.
ट्विटर ने बताया कि जुलाई से दिसंबर 2021 के बीच उसे दुनियाभर से सत्यापित पत्रकारों और मीडिया संस्थानों से जुड़े 349 एकाउंट पर मौजूद सामग्री को हटाने की कानूनी मांग हासिल हुई. कंपनी के मुताबिक, जिन एकाउंट की सामग्री पर आपत्ति दर्ज कराई गई, उनकी संख्या पूर्व की अवधि (जनवरी से जून 2021) से 103 फीसदी अधिक है.

ट्विटर के अनुसार, इस वृद्धि के लिए मुख्य रूप से भारत (114), तुर्की (78), रूस (55) और पाकिस्तान (48) द्वारा दाखिल कानूनी आपत्तियां जिम्मेदार हैं.

मालूम हो कि भारत जनवरी से जून 2021 के बीच की अवधि में भी इस सूची में शीर्ष पर था. उस अवधि में ट्विटर को वैश्विक स्तर पर हासिल ऐसी कानूनी मांगों में से 89 भारत से जुड़ी थीं.

ट्विटर ने कहा कि ‘कानूनी मांगों’ में सामग्री हटाने से संबंधित अदालती आदेश और अन्य औपचारिक मांगें शामिल हैं, जो सरकारी निकायों और व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ताओं से प्राप्त होती हैं.

बिना कोई विवरण देते हुए कंपनी ने बताया कि 2021 की दूसरी छमाही में वैश्विक स्तर पर प्रमाणित पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के 17 ट्वीट हटाए गए, जबकि साल की पहली छमाही में ऐसे ट्वीट की संख्या 11 थी.

ट्विटर ने बताया कि उसे भारत के राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से एक नाबालिग के निजता संबंधी मुद्दों को लेकर उससे जुड़ी सामग्री हटाने की कानूनी मांग हासिल हुई है.

हालांकि, कंपनी ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उसका संदर्भ कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा पिछले साल अगस्त में किए गए ट्वीट को लेकर माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म की शिकार एक नाबालिग दलित लड़की के माता-पिता से अपनी मुलाकात की तस्वीर साझा की थी.

ट्विटर ने कहा, ‘भारतीय कानून के मुताबिक एक वरिष्ठ राजनेता द्वारा किए गए ट्वीट को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया था.’

जून से 2021 के बीच ट्विटर को उपयोगकर्ताओं के एकाउंट से जुड़ी जानकारी मुहैया कराने के दूसरे सर्वाधिक सरकारी अनुरोध भी भारत से मिले.

कंपनी ने कहा, ‘इस अ वधि में अमेरिका से सबसे ज्यादा सरकारी सूचना अनुरोध प्राप्त हुए, जो वैश्विक स्तर पर हासिल अनुरोध का 20 प्रतिशत और निर्दिष्ट वैश्विक खातों का 39 फीसदी हैं.’

ट्विटर के मुताबिक, ‘दूसरे सर्वाधिक सरकारी सूचना अनुरोध भारत से प्राप्त हुए, जो वैश्विक स्तर पर हासिल अनुरोध का 19 प्रतिशत और निर्दिष्ट वैश्विक खातों का 27 फीसदी हैं.’

सर्वाधिक सरकारी सूचना अनुरोध देने वाले शीर्ष पांच देशों में जापान, फ्रांस और जर्मनी भी शामिल हैं.

पारदर्शिता रिपोर्ट में बताया गया है कि जून से दिसंबर 2021 के बीच ट्विटर को भारत से 63 अतिरिक्त (पिछली अवधि से तीन फीसदी ज्यादा) यानी 2,211 नियमित अनुरोध मिले, जबकि इस अवधि में अनुरोधों के लिए निर्दिष्ट नियमित खातों की संख्या 205 (पिछली अवधि से तीन प्रतिशत अधिक) की वृद्धि के साथ 7,768 पर पहुंच गई.
वैश्विक स्तर पर ट्विटर को 11,460 अनुरोध प्राप्त हुए.

भारत से की गई कानूनी मांगों का विवरण देते हुए ट्विटर ने बताया कि जुलाई से दिसंबर 2021 के बीच दुनियाभर में सामग्री हटाने के लिए किए गए कुल 47,572 अनुरोध में से 3,992 यानी आठ प्रतिशत अनुरोध भारत से मिले थे. इनमें 23 अदालती आदेश और 3,969 अन्य कानूनी मांगें शामिल थीं.

इस दौरान ट्विटर ने भारत में 88 एकाउंट और 303 ट्वीट पर रोक लगा दी.

ट्विटर के दिशा-निर्देशों के अनुसार, ‘सरकारी सूचना अनुरोधों’ में कानून प्रवर्तन और अन्य सरकारी एजेंसियों द्वारा खाते की जानकारी के लिए जारी आपातकालीन और नियमित कानूनी मांगें शामिल हैं.

वहीं, ‘नियमित अनुरोध’ (यानी गैर-आपातकालीन अनुरोध) में सरकार या कानून प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा जारी कानूनी मांगें (मसलन समन, अदालती आदेश, तलाश वारंट) शामिल हैं, जो ट्विटर को एकाउंट की जानकारी साझा करने के लिए बाध्य करते हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ट्विटर ने कहा कि वह वैध ‘आपातकालीन अनुरोध’ के जवाब में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को खाते की जानकारी का खुलासा कर सकता है यदि उसे पर्याप्त जानकारी देते हुए यह भरोसा दिलाया जाए कि एक आसन्न खतरा है जिसमें किसी व्यक्ति की मृत्यु या गंभीर शारीरिक चोट का खतरा है और इसमें खतरे को टालने या कम करने के लिए प्रासंगिक जानकारी है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि कानूनी मांगों की कुल वैश्विक संख्या का 97 प्रतिशत केवल पांच देशों (घटते क्रम में) से उत्पन्न हुआ: जापान, रूस, दक्षिण कोरिया, तुर्की और भारत – ये पांच देश पिछले तीन वर्षों में कानूनी मांगों के लिए ट्विटर के शीर्ष अनुरोध करने वाले देश बने रहे हैं.

भारत पांचवां सबसे बड़ा अनुरोधकर्ता है, जो वैश्विक कानूनी मांगों के 8 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार है.

इसमें कहा, ‘शीर्ष पांच अनुरोधकर्ताओं में अपनी स्थिति को बनाए रखते हुए, भारतीय अधिकारियों ने इस रिपोर्टिंग अवधि में महत्वपूर्ण संख्या में कानूनी मांगें प्रस्तुत करना जारी रखा, जिसमें बड़ी संख्या में यूआरएल भी शामिल हैं.’

गौरतलब है कि बीते 27 जुलाई को केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि 2014 से 2020 के बीच केंद्र की मोदी सरकार द्वारा विभिन्न सोशल मीडिया कंपनियों और टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं को जारी किए गए सामग्री हटाने या ब्लॉक करने संबंधी आदेशों की संख्या में लगभग 2,000 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. 2014 में ऐसे आदेशों की संख्या 471 थी, जो 2020 में बढ़कर 9,849 पहुंच गई.

आंकड़ों के अनुसार, जून 2022 तक ट्विटर को 1,122 ब्लॉकिंग के आदेश जारी किए गए थे, जबकि पूरे 2019 वर्ष में ऐसे आदेशों की संख्या 1,041 थी.

वर्ष 2021 में ट्विटर को आईटी अधिनियम-2000 की धारा 69(ए) के तहत 2,851 ब्लॉकिंग आदेश जारी किए गए थे, जो कि किसी भी वर्ष में सर्वाधिक हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

Without giving any details, the company said that 17 tweets from globally certified journalists and media organizations were removed in the second half of 2021, compared to 11 in the first half of the year.

Although the company did not name anyone, its reference is believed to be a reference to Congress leader Rahul Gandhi’s tweet in August last year, in which he allegedly met the parents of a minor Dalit girl who was gang-raped. Shared a picture of their meeting.

Twitter said, “Tweet by a senior politician was banned in India in accordance with Indian law.”

“The US received the highest number of government information requests during this period, accounting for 20 percent of requests received globally and 39 percent of specified global accounts,” the company said.

According to Twitter, “the second highest number of government information requests were received from India, accounting for 19 percent of requests received globally and 27 percent of specified global accounts.”

Japan, France and Germany are also among the top five countries with the most government information requests.
The Transparency Report states that between June and December 2021, Twitter received 63 additional (3 per cent increase from the previous period) i.e. 2,211 regular requests from India, while the number of regular accounts designated for requests during this period was 205 (from the previous period). Three percent more) to 7,768.
Twitter received 11,460 requests globally.

During this, Twitter banned 88 accounts and 303 tweets in India.

According to news agency PTI, Twitter said it may disclose account information to law enforcement agencies in response to a valid ’emergency request’ if it is given sufficient information to assure that there is an imminent threat in which a person’s There is a risk of death or serious bodily injury and contains relevant information to avert or reduce the risk.

Significantly, on July 27, the Central Government told Parliament that between 2014 and 2020, the number of removal or blocking orders issued by the Modi government at the Center to various social media companies and telecom service providers has increased by about 2,000 percent. developed. The number of such orders was 471 in 2014, which increased to 9,849 in 2020.

According to the data, 1,122 blocking orders were issued to Twitter till June 2022, while the number of such orders in the entire 2019 year was 1,041.

In the year 2021, 2,851 blocking orders were issued to Twitter under Section 69(a) of the IT Act-2000, which is the highest in any year.

(with input from news agency language)

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