चंडीगढ़ में 2 लाख मतदाता कम होना केवल आंकड़ा नहीं, शहर के भविष्य पर गंभीर संकेत: राजबीर सिंह भारतीय

चंडीगढ़ वार्ड नंबर-6 में 52.76 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटना बेहद गंभीर, क्या यह बढ़ते पलायन का संकेत है?
लगभग दो लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मामला लोकतंत्र के लिए भी गंभीर चिंता का विषय
चंडीगढ़, /06 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
ऑल मनीमाजरा रेजिडेंट्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन (सेक्टर-13) चंडीगढ़ के संस्थापक अध्यक्ष राजबीर सिंह भारतीय ने चंडीगढ़ के प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) संबंधी रिपोर्टों तथा सांसद मनीष तिवारी द्वारा उठाए गए प्रश्नों का गंभीर अध्ययन करने के बाद कहा कि चंडीगढ़ में लगभग 2,09,523 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटने का मामला केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए। यह शहर के सामाजिक, आर्थिक, रोजगार और जनसंख्या संबंधी बदलावों का भी गंभीर संकेत हो सकता है, जिसकी निष्पक्ष जांच और व्यापक समीक्षा समय की मांग है।
उन्होंने कहा कि प्रकाशित समाचारों के अनुसार जून 2024 के लोकसभा चुनाव के समय चंडीगढ़ में कुल 6,59,805 मतदाता थे, जबकि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद संशोधित मतदाता सूची में यह संख्या घटकर 4,50,282 रह गई है। अर्थात 2,09,523 मतदाताओं के नाम सूची से हट गए, जो कुल मतदाताओं का लगभग 31.76 प्रतिशत है। इतना बड़ा अंतर सामान्य नहीं माना जा सकता और इसके कारणों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि सबसे अधिक चिंता का विषय यह है कि मनीमाजरा के वार्ड नंबर-6 में लगभग 52.76 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटने की बात सामने आई है। इसके अलावा शहर के कई अन्य वार्डों में भी 40 से 46 प्रतिशत तक मतदाता सूची में कमी दर्ज की गई है। यह केवल सांख्यिकीय परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और नीति-निर्माताओं के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय है।
उन्होंने कहा कि वार्ड नंबर-6 तथा शहर की अनेक कॉलोनियों में बड़ी संख्या में मजदूर वर्ग, निम्न आय वर्ग तथा अन्य राज्यों से आकर बसे परिवार रहते हैं। ऐसे में स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठता है कि क्या चंडीगढ़ से बढ़ता पलायन भी इस स्थिति का एक कारण हो सकता है? इस संबंध में बिना जांच कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का कम होना इस संभावना की ओर अवश्य संकेत करता है कि शहर की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव आ रहा है।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि पिछले कई वर्षों से चंडीगढ़ में न तो कोई बड़ा सरकारी सार्वजनिक उपक्रम स्थापित हुआ है और न ही ऐसी नई औद्योगिक इकाइयां या फैक्ट्रियां आई हैं, जिनसे बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होते। रोजगार के सीमित अवसरों का सबसे अधिक असर मजदूर वर्ग, निम्न आय वर्ग और युवाओं पर पड़ा है। यदि लोगों को रोजगार नहीं मिलेगा तो उनका अपने मूल राज्यों की ओर लौटना स्वाभाविक है। इस पहलू का भी गंभीर अध्ययन होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज चंडीगढ़ में रहने की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। मकानों की कीमतें और किराए आम आदमी की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन तथा दैनिक जीवन का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अनेक परिवार आर्थिक मजबूरी के कारण कम खर्च वाले शहरों या अपने मूल राज्यों की ओर लौटने का निर्णय ले रहे हों, इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि एक और महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि चंडीगढ़ में वर्षों से रह रहे अनेक लोग आज भी हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर जैसे अपने मूल राज्यों की मतदाता सूची तथा सरकारी योजनाओं से जुड़े हुए हैं। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि पड़ोसी राज्यों में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा अपेक्षाकृत अधिक है। उदाहरण के तौर पर वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं में चंडीगढ़ और पड़ोसी राज्यों के बीच उल्लेखनीय अंतर दिखाई देता है। ऐसी परिस्थितियों में लोगों का अपने मूल राज्यों से जुड़ाव बनाए रखना स्वाभाविक माना जा सकता है।
उन्होंने कहा कि एक समय था जब देशभर के लोग चंडीगढ़ में बसना अपनी उपलब्धि और सम्मान मानते थे। लोग छोटे-से-छोटे मकान में रहकर भी इस शहर को अपना स्थायी घर बनाना चाहते थे। लेकिन यदि आज परिस्थितियां ऐसी बन रही हैं कि लोग रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और बेहतर जीवन की तलाश में चंडीगढ़ छोड़ रहे हैं, तो यह केवल मतदाता सूची का विषय नहीं, बल्कि शहर के भविष्य, उसकी अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना से जुड़ा अत्यंत गंभीर प्रश्न है।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि यह विषय किसी राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। यह हर नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार, चंडीगढ़ के विकास मॉडल और प्रशासनिक नीतियों से जुड़ा विषय है। इसलिए इस पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्यात्मक, निष्पक्ष और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग, चंडीगढ़ प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं और बुद्धिजीवियों से आग्रह किया कि वे इस पूरे विषय का वार्डवार, कारणवार और तथ्यात्मक विश्लेषण सार्वजनिक करें तथा यह भी अध्ययन कराएं कि मतदाताओं की संख्या में आई भारी कमी के पीछे प्रशासनिक कारण अधिक हैं या सामाजिक एवं आर्थिक कारण।
राजबीर सिंह भारतीय ने निम्नलिखित मांगें भी रखीं—
मतदाता सूची से हटाए गए सभी मतदाताओं का वार्डवार एवं कारणवार विवरण सार्वजनिक किया जाए।
जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जाए।
किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना पर्याप्त जांच और पूर्व सूचना के अंतिम सूची से न हटाया जाए।
पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाई जाए।
चंडीगढ़ में रोजगार, पलायन, सामाजिक सुरक्षा, आवास और जनसंख्या परिवर्तन पर विशेषज्ञों की समिति बनाकर विस्तृत अध्ययन कराया जाए तथा उसके आधार पर दीर्घकालिक नीति तैयार की जाए।
अंत में राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि यदि समय रहते इस विषय पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में चंडीगढ़ की सामाजिक, आर्थिक और लोकतांत्रिक स्थिति पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं। यह केवल मतदाता सूची का मामला नहीं, बल्कि इस बात का संकेत भी हो सकता है कि कहीं चंडीगढ़ धीरे-धीरे अपनी स्थायी आबादी, श्रमशक्ति और सामाजिक जीवंतता तो नहीं खो रहा। प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और समाज के सभी जिम्मेदार वर्गों को मिलकर इस विषय पर गंभीर मंथन करना होगा, ताकि चंडीगढ़ एक बार फिर लोगों की पहली पसंद बन सके।