फरीदाबाद: दीपावली कॉलोनी के 3000 परिवारों पर उजड़ने का संकट

www.atalhind.com14 June 20262 min read0 viewsफरीदाबाद
फरीदाबाद: दीपावली कॉलोनी के 3000 परिवारों पर उजड़ने का संकट

फरीदाबाद की दीपावली कॉलोनी के हजारों परिवारों की रातों की नींद उड़ गई है। नेहरू कॉलोनी में हुई हालिया तोड़फोड़ के बाद अब प्रशासन का रुख दीपावली कॉलोनी की ओर हो गया है

 

फरीदाबाद /13 जून 2026 /अटल हिन्द/योगेश गर्ग

दीपावली कॉलोनी के 3000 परिवारों पर उजड़ने का संकट, प्रशासन ने थमाया नोटिस
फरीदाबाद। फरीदाबाद की दीपावली कॉलोनी के हजारों परिवारों की रातों की नींद उड़ गई है। नेहरू कॉलोनी में हुई हालिया तोड़फोड़ के बाद अब प्रशासन का रुख दीपावली कॉलोनी की ओर हो गया है, जहाँ के घरों के बाहर प्रशासन ने नोटिस चस्पा किए हैं। इन नोटिसों में स्पष्ट रूप से अतिक्रमण हटाने और अवैध निर्माण पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है, जिससे कॉलोनी में डर और अनिश्चितता का माहौल है।

क्या है प्रशासन का तर्क?
जिला नगर योजनाकार (एनफोर्समेंट) यमन चौधरी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत सड़क, स्कूल साइट, ग्रीन बेल्ट और अन्य सार्वजनिक उपयोगी भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाया जाना अनिवार्य है। प्रशासन ने निवासियों को सलाह दी है कि वे समय रहते अपना सामान सुरक्षित स्थान पर ले जाएं, क्योंकि तोड़फोड़ का अभियान कभी भी शुरू किया जा सकता है।

30 सालों से रह रहे परिवारों के सामने अस्तित्व की लड़ाई
इस कार्रवाई से लगभग 3000 परिवार प्रभावित हो रहे हैं, जिनमें से कई परिवार यहाँ पिछले 30 से 35 वर्षों से रह रहे हैं। निवासियों की पीड़ा और संघर्ष की कुछ झलकियाँ:

दस्तावेजों के बावजूद खतरा: निवासियों का कहना है कि वे समय पर बिजली बिल और हाउस टैक्स भर रहे हैं। उनके पास आधार कार्ड और वोटर कार्ड भी हैं, फिर भी सरकार उनके सिर से छत छीनने पर उतारू है।

नेताओं के आश्वासनों पर अविश्वास: स्थानीय निवासियों का कहना है कि नेहरू कॉलोनी में भी तोड़फोड़ से पहले आश्वासन दिए गए थे, जो खोखले साबित हुए। इसलिए अब उन्हें नेताओं की बातों पर भरोसा नहीं है।

पूरी रात जाग रहे लोग: तोड़फोड़ के डर से दीपावली कॉलोनी और आसपास की कॉलोनियों के लोग रात भर जागकर अपने घरों की निगरानी कर रहे हैं।

कोर्ट की शरण: स्थानीय लोगों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपना मकान खाली नहीं करेंगे। यदि आवश्यकता पड़ी तो वे सुप्रीम कोर्ट तक जाने को तैयार हैं, हालांकि सिविल कोर्ट की छुट्टियों के कारण उन्हें कानूनी मदद में कठिनाई हो रही है।

निवासियों का दर्द
स्थानीय निवासी भगवान दास के अनुसार, उन्होंने अपनी जमीन बेचकर और मेहनत की कमाई से यहाँ घर बनाया था। अब घर टूटने पर उनके पास रहने के लिए कोई विकल्प नहीं बचेगा। वहीं, चंदन नामक युवक का कहना है कि उनका जन्म और पालन-पोषण यहीं हुआ है और वे अपने आशियाने को उजड़ते हुए नहीं देख सकते।

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