गोल्डेन दास की दहाड़ से सामंतवादी खेमे में खलबली: भोजपुर महापंचायत को लेकर आर-पार के मूड में बहुजन आर्मी

www.atalhind.com3 July 20263 min read0 viewsबिहार
गोल्डेन दास की दहाड़ से सामंतवादी खेमे में खलबली: भोजपुर महापंचायत को लेकर आर-पार के मूड में बहुजन आर्मी

गोल्डेन दास की दहाड से राष्ट्रीय जन तांत्रिक गढबंधन पार्टी के कुच्छ सामान्तवादी बिचार रखने बाले नेताओ मे बेचैनी ।

धनबाद /3 जुलाई 2026 / अटल हिन्द ब्यूरो

बिहार के भोजपुर में 5 जुलाई 2026 को आयोजित होने वाली बहुजन महापंचायत को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। बहुजन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गोल्डेन दास के नेतृत्व में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर सामंतवादी विचारधारा के नेताओं में बेचैनी का माहौल है। बहुजन आर्मी के झारखंड प्रदेश प्रभारी रामाशीष चौहान ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने दबाव में आकर पहले दी गई अनुमति को रद्द कर दिया है। हालांकि, बहुजन समाज ने हार न मानते हुए कार्यक्रम को सरकारी मैदान के बजाय निजी जमीन पर आयोजित करने का साहसी निर्णय लिया है।

विवाद का केंद्र: सम्राट चौधरी का सम्मान और राजनीतिक वर्चस्व

बहुजन आर्मी का स्पष्ट मानना है कि बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बहुजन समाज का बेटा होना कुछ सामंतवादी ताकतों को रास नहीं आ रहा है। रामाशीष चौहान का दावा है कि भरत तिवारी एनकाउंटर केवल एक बहाना है, असली संघर्ष मुख्यमंत्री की कुर्सी और बहुजन समाज के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को रोकने का है।

“जब तक बहुजन समाज का हाथ भाई सम्राट चौधरी जी के साथ है, तब तक सामंतवादी विचारधारा रखने वाले नेताओं का मुख्यमंत्री बनने का सपना सपना ही रह जाएगा।”

बहुजन समाज की 10 प्रमुख मांगें

प्रशासन से शांतिपूर्ण आयोजन के सहयोग की अपील करते हुए, बहुजन आर्मी ने सरकार के समक्ष अपनी 10 सूत्रीय मांगें रखी हैं:

  1. SC/ST एक्ट: कानून का सही और प्रभावी तरीके से पालन सुनिश्चित हो।

  2. आनुपातिक प्रतिनिधित्व: आबादी के अनुसार बड़े सरकारी पदों पर नियुक्ति की जाए।

  3. आरक्षण: बिहार में 69% आरक्षण को तत्काल लागू किया जाए।

  4. पदोन्नति में आरक्षण: प्रमोशन के दौरान भी आरक्षण का लाभ मिले।

  5. कॉलेजियम सिस्टम: इस प्रणाली को समाप्त किया जाए।

  6. विशेष सुरक्षा: OBC और EBC समाज के लिए SC/ST एक्ट के तर्ज पर कानून बने।

  7. UGC रेगुलेशन: शैक्षणिक संस्थानों में इसे सख्ती से लागू किया जाए।

  8. मुफ्त शिक्षा: गरीब बहुजन छात्रों को देश-विदेश में उच्च शिक्षा के लिए मुफ्त अवसर मिलें।

  9. EWS आरक्षण: इस व्यवस्था को समाप्त करने की मांग।

  10. न्यायपूर्ण प्रशासन: भ्रष्टाचार के मामलों की जांच में जातीय भेदभाव पूरी तरह बंद हो।

 सत्ता बनाम जन-आंदोलन

भोजपुर में निजी जमीन पर कार्यक्रम करने का निर्णय यह दर्शाता है कि बहुजन आर्मी अब झुकने के मूड में नहीं है। यह महापंचायत केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बहुजन समाज की बढ़ती चेतना और राजनीतिक लामबंदी का प्रतीक बन गई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन अब इस निजी आयोजन को लेकर क्या रुख अपनाता है और बिहार की सियासत में यह ‘दहाड़’ क्या गुल खिलाती है।

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