गुरुग्राम पुलिस का बड़ा खुलासा वायरल वीडियो की फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट बनाने के षड्यंत्र का पर्दाफाश, दो आरोपी गिरफ्तार

वायरल वीडियो से फर्जी फोरेंसिक एवं साईबर विश्लेषण रिपोर्ट तैयारी षड्यंत्र का पर्दाफाश
गुरुग्राम/23 जून 2026/अटल हिन्द/फतह सिंह उजाला
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े कथित वायरल वीडियो विवाद में एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। गुरुग्राम पुलिस ने वायरल वीडियो के संबंध में कथित तौर पर फर्जी फोरेंसिक और साइबर विश्लेषण रिपोर्ट तैयार कराने के षड्यंत्र का पर्दाफाश करने का दावा किया है। इस मामले में थाना डीएलएफ सेक्टर-29, गुरुग्राम में विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो युवकों को गिरफ्तार भी कर लिया है।
यह मामला उस समय और गंभीर हो गया जब डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ जसप्रीत जस्सी ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया कि उनसे दबाव बनाकर एक वायरल वीडियो के संबंध में मनचाही रिपोर्ट तैयार कराने का प्रयास किया गया था। शिकायत के आधार पर गुरुग्राम पुलिस ने जांच शुरू की और शुरुआती पड़ताल में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता जसप्रीत जस्सी डिजिटल फोरेंसिक, साइबर जांच और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य विश्लेषण के क्षेत्र में कार्य करते हैं। उन्होंने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि कुछ लोगों ने स्वयं को पंजाब सरकार के वरिष्ठ अधिकारी बताकर उनसे संपर्क किया। इन लोगों ने उनसे एक वायरल वीडियो के संबंध में ऐसी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने को कहा, जिससे वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान को नकारा जा सके और वीडियो से जुड़े आरोपों को झूठा साबित किया जा सके।
जस्सी के अनुसार, उन्हें इस काम के लिए कई व्यक्तियों और संस्थाओं से जोड़ा गया। कथित तौर पर कुछ संदिग्ध और फर्जी साइबर तथा फोरेंसिक संस्थानों के नाम पर रिपोर्ट तैयार करवाई गई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि रिपोर्ट को एक निश्चित निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए बार-बार संशोधित कराया गया और इसके लिए भारी रकम का लालच भी दिया गया।
10 लाख रुपये नकद देने का भी आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उन्हें लगभग 10 लाख रुपये नकद उपलब्ध कराए गए थे। इसके अलावा रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों को भी अलग-अलग माध्यमों से भुगतान किया गया। बाद में जब जस्सी ने संबंधित संस्थाओं और रिपोर्टों की जांच की तो उनकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
शिकायत में यह भी कहा गया कि जब उन्होंने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई और सच्चाई सामने लाने की बात कही, तो उन्हें कथित रूप से धमकियां दी गईं और पूरे मामले को सार्वजनिक न करने का दबाव बनाया गया।
पुलिस ने दर्ज किया केस, विशेष टीम बनाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुग्राम पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की। तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्यों, वित्तीय लेन-देन और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर थाना डीएलएफ सेक्टर-29 में एफआईआर दर्ज की गई।
इसके बाद पुलिस उपायुक्त अपराध के निर्देशन में अपराध शाखा सेक्टर-40 के प्रभारी उपनिरीक्षक ललित के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम गठित की गई। टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए सोमवार को दो आरोपियों को गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है—
1. अरुण महेंद्रू (25 वर्ष)
निवासी अग्रसेन कॉलोनी, सिरसा
2. अंकित (25 वर्ष)
निवासी खरक गागर, जिला जींद
पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी कथित फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने और उसे प्रमाणिक दिखाने की प्रक्रिया में शामिल थे।
कौन है अरुण महेंद्रू?
पुलिस जांच में सामने आया है कि अरुण महेंद्रू सिरसा के अग्रसेन कॉलोनी निवासी अशोक का पुत्र है और पंचकूला में एक सरकारी विभाग में कॉन्ट्रैक्ट आधार पर कार्य करता है।
आरोप है कि उसने “साइबर यान लैब” नाम से वीडियो विश्लेषण रिपोर्ट जारी की, जबकि जांच में ऐसी किसी लैब के अस्तित्व की पुष्टि नहीं हुई। पुलिस का कहना है कि अरुण न तो इस नाम की किसी संस्था का कर्मचारी है और न ही उसे ऐसी रिपोर्ट जारी करने का अधिकार था। इसके बावजूद उसने कथित तौर पर रिपोर्ट पर हस्ताक्षर किए।
अंकित पर भी गंभीर आरोप
दूसरे आरोपी अंकित के बारे में पुलिस का कहना है कि वह दिल्ली में एक सरकारी विभाग के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत है। उसने “साइफर सेंटिनल लैब” के नाम से वीडियो विश्लेषण रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
पुलिस जांच में पाया गया कि इस नाम की कोई अधिकृत या पंजीकृत लैब मौजूद नहीं है। न ही यह किसी सरकारी विभाग में रजिस्टर्ड है। पुलिस का दावा है कि अंकित का भी उस कथित लैब से कोई आधिकारिक संबंध नहीं था।
पूछताछ में जुटी पुलिस
गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी रिपोर्ट तैयार कराने के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे, किन संस्थाओं के नाम का इस्तेमाल किया गया और इस पूरे नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था।
इसके अलावा पुलिस धन के स्रोत, भुगतान के तरीके, बैंक लेन-देन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं वीडियो या उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ तो नहीं की गई।
अन्य आरोपियों की तलाश जारी
गुरुग्राम पुलिस का कहना है कि मामले की जांच पूरी गंभीरता और पेशेवर तरीके से की जा रही है। अब तक मिले साक्ष्यों के आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों की एजेंसियों और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद भी ली जाएगी।
पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया, डिजिटल साक्ष्यों और वैज्ञानिक जांच को प्रभावित करने का कोई भी प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पंजाब कांग्रेस ने उठाए सवाल
मामले के सामने आने के बाद पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि गुरुग्राम पुलिस की एफआईआर ने कांग्रेस के उन आरोपों को बल दिया है, जिनमें कहा गया था कि विवादित वीडियो मामले में तथ्यों को प्रभावित करने के लिए कथित फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट का सहारा लिया गया।
खैरा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस्तीफे की मांग करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है।
क्या है भगवंत मान वायरल वीडियो विवाद?
विवाद उस वायरल वीडियो को लेकर है जिसमें एक व्यक्ति सिख गुरुओं की तस्वीरों पर शराब के छींटे मारता दिखाई दे रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने दावा किया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान हैं।
इस विवाद के बाद 5 जनवरी 2026 को अकाल तख्त साहिब ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को तलब किया था। अकाल तख्त के समक्ष पेश होकर भगवंत मान ने लिखित रूप से कहा था कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं।
बाद में वीडियो की सत्यता जांचने के लिए विभिन्न फोरेंसिक संस्थानों से रिपोर्ट मंगाई गई। इसी दौरान अलग-अलग रिपोर्टों और दावों को लेकर विवाद और गहरा गया। अब गुरुग्राम पुलिस द्वारा दर्ज किए गए इस मामले ने पूरे प्रकरण को नया मोड़ दे दिया है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान का पक्ष
मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार यह कहते रहे हैं कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं। उनका दावा है कि वीडियो में मौजूद व्यक्ति की शारीरिक बनावट और कद-काठी उनसे मेल नहीं खाती। आम आदमी पार्टी की ओर से भी कई बार कहा गया है कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति कोई अन्य व्यक्ति है।
फिलहाल गुरुग्राम पुलिस की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।