हरियाणा के वोटर सावधान! 14 जुलाई के बाद छिन सकता है वोटिंग का अधिकार

हरियाणा के वोटर सावधान! 14 जुलाई के बाद छिन सकता है वोटिंग का अधिकार

हरियाणा के वोटर सावधान वरना छीन जाएगा वोट देने का अधिकार14 जुलाई तक जमा न करने पर कटेगा नाम

 

हरियाणा में मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण तेज: 1.99 करोड़ वोटरों को मिले गणना प्रपत्र, 14 जुलाई तक फॉर्म जमा नहीं किया तो कटेगा नाम

चंडीगढ़ / 07 जुलाई 2026 / अटल हिन्द ब्यूरो

हरियाणा में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का कार्य बेहद तेजी से चल रहा है। निर्वाचन अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, राज्य के 96 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं तक गणना प्रपत्र पहुंचाए जा चुके हैं। बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) सुबह से लेकर देर रात तक लोगों के फॉर्म भरवाने और उनकी समस्याओं का समाधान करने में जुटे हुए हैं।

96.43% मतदाताओं तक पहुंचे फॉर्म, 1.22 करोड़ ऑनलाइन अपलोड
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 1.99 करोड़ से अधिक मतदाताओं (कुल मतदाताओं के 96.43 प्रतिशत) को गणना प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं। राहत की बात यह है कि इनमें से करीब 1.22 करोड़ (59.11 प्रतिशत) भरे हुए प्रपत्र बीएलओ द्वारा प्राप्त कर ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड भी किए जा चुके हैं।

 

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क्या है प्रक्रिया और क्यों जरूरी है रसीद?
निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत चलाए जा रहे इस अभियान में प्रत्येक मतदाता को गणना प्रपत्र की दो प्रतियां दी जा रही हैं।

मतदाताओं को अपनी आवश्यक और सही जानकारी भरकर एक प्रति पर हस्ताक्षर करके संबंधित बीएलओ को सौंपनी है।

दूसरी प्रति पर बीएलओ से ‘प्राप्ति रसीद’ (Acknowledgment Receipt) लेकर अपने पास सुरक्षित रखनी है।

 

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मुख्य निर्वाचन अधिकारी की चेतावनी: 14 जुलाई है आखिरी तारीख
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए. श्रीनिवास ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं मतदाताओं के नाम 21 जुलाई को प्रकाशित होने वाली मसौदा मतदाता सूची (Draft Voter List) में शामिल किए जाएंगे, जिनके हस्ताक्षरित प्रपत्र बीएलओ को प्राप्त होंगे। यदि कोई मतदाता निर्धारित समय सीमा तक अपना प्रपत्र जमा नहीं करता है, तो उसका नाम मसौदा सूची से हटा दिया जाएगा। उन्होंने सभी पात्र मतदाताओं से अपील की है कि वे 14 जुलाई तक सही जानकारी के साथ प्रपत्र भरकर हर हाल में जमा करा दें।

साल 2002 के रिकॉर्ड को लेकर आ रही है परेशानी
इस महाअभियान के बीच जमीनी स्तर पर कुछ व्यावहारिक दिक्कतें भी सामने आ रही हैं। बीएलओ के सामने सबसे ज्यादा परेशानी उन मामलों में आ रही है, जहां मतदाताओं के नाम साल 2002 की पुरानी वोटर लिस्ट में नहीं मिल रहे हैं। इसके अलावा, कई परिवारों में माता-पिता का निधन हो जाने की वजह से भी पुरानी सूचियों में नाम ढूंढने और रिकॉर्ड का मिलान करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फिर भी, चुनावी तंत्र इस पुनरीक्षण कार्य को समय पर पूरा करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

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