टेक प्लेटफॉर्म्स पर नफरत का राग: ‘हिंदुत्व पॉप’ के बढ़ते खतरे और कंपनियों की चुप्पी पर विशेष रिपोर्ट

www.atalhind.com15 June 20263 min read0 viewsअमेरिका
टेक प्लेटफॉर्म्स पर नफरत का राग: ‘हिंदुत्व पॉप’ के बढ़ते खतरे और कंपनियों की चुप्पी पर विशेष रिपोर्ट

भारत में हेट म्यूज़िक का बढ़ता प्रभाव: हिन्दुत्व पॉप, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों पर विस्तृत रिपोर्ट

मेटा, यूट्यूब और स्पॉटिफाई जैसे दिग्गज प्लेटफॉर्म्स पर कैसे पनप रहा ‘नफरती संगीत’? – एक विशेष रिपोर्ट

वाशिंगटन डीसी/नई दिल्ली/ /15 जून 2026 / अटल हिन्द ब्यूरो

एक हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए संगीत का एक नया और खतरनाक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। ‘इंडिया हेट लैब’ की रिपोर्ट ‘हेट स्पीच इवेंट्स इन इंडिया’ के अनुसार, 2023 के बाद से नफरत फैलाने वाले भाषणों और कंटेंट में 97% की भारी वृद्धि देखी गई है।

क्या है ‘हिंदुत्व पॉप’ (H-Pop)?
पिछले कुछ वर्षों में ‘हिंदुत्व पॉप’ या ‘H-Pop’ नाम का एक नया संगीत चलन उभरा है। यह संगीत सीधे तौर पर हिंदुत्व विचारधारा को बढ़ावा देता है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य मुसलमानों और ईसाइयों का विद्रूपिकरण (Dehumanization) करना और बहुसंख्यक हिंदुओं के बीच डर व नफरत पैदा करना है। रिपोर्ट के अनुसार, ये गाने अक्सर हिंसा भड़काने, बहिष्कार करने और अल्पसंख्यकों को शारीरिक नुकसान पहुंचाने का आह्वान करते हैं।

छोटू सिंह रावना का "राम मंदिर" गाने वाला YouTube वीडियो
छोटू सिंह रावना का “राम मंदिर” गाने वाला YouTube वीडियो

आंकड़ों की जुबानी
रिपोर्ट में YouTube, Spotify, Meta Music Library और Apple Music पर कुल 523 नफरती गानों की पहचान की गई है, जो इन प्लेटफॉर्म्स की अपनी ‘कंटेंट पॉलिसी’ का सीधा उल्लंघन करते हैं:

YouTube: 210 गाने (198 मिलियन से अधिक बार देखे गए)।

Spotify: 109 गाने (53 कलाकारों द्वारा निर्मित)।

Meta (Instagram Reels): 103 गाने (5.9 मिलियन से अधिक रील्स में इस्तेमाल)।

Apple Music: 101 गाने।

चिंताजनक तथ्य:
हिंसा का खुला आह्वान: इन प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद हर दूसरा गाना (कुल का 50%) सीधे तौर पर हिंसा या नफरत को बढ़ावा देने वाला है।

मोनिटाइजेशन: हैरानी की बात यह है कि इन नफरती गानों पर प्रमुख ब्रांड्स के विज्ञापन चल रहे हैं और इन्हें यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स द्वारा सम्मानित भी किया गया है।

असफल रिपोर्टिंग: अक्टूबर 2025 में रिपोर्ट किए गए 225 गानों में से मई 2026 तक केवल 8% (18 गाने) ही हटाए गए। बाकी 92% कंटेंट अभी भी लाइव है।

Spotify पर संदीप आचार्य का “राम लला का धाम है” गाना
Spotify पर संदीप आचार्य का “राम लला का धाम है” गाना

प्लेटफॉर्म्स की भूमिका और जवाबदेही
रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि ये बड़ी टेक कंपनियां अपने ही बनाए नियमों का पालन करने में विफल रही हैं। यूट्यूब पर 3 मुख्य चैनल कुल नफरती गानों के 40% के लिए जिम्मेदार हैं, इसके बावजूद ये चैनल ‘वेरिफाइड’ हैं और कमाई कर रहे हैं। स्पॉटिफाई और एप्पल म्यूजिक में तो रिपोर्टिंग के लिए कोई प्रभावी मैकेनिज्म तक मौजूद नहीं है।

भविष्य के लिए सुझाव
विशेषज्ञों का कहना है कि नफरती संगीत का यह प्रसार ‘ऑफलाइन’ हिंसा (जैसे दंगों और मारपीट) को हवा दे रहा है। रिपोर्ट में इन दिग्गज प्लेटफॉर्म्स से सिफारिश की गई है कि वे:

अपनी कंटेंट मॉडरेशन नीतियों को सख्ती से लागू करें।

उपयोगकर्ता के अनुकूल (user-friendly) रिपोर्टिंग मैकेनिज्म तैयार करें।

नफरती कंटेंट से होने वाली कमाई (मोनिटाइजेशन) पर तुरंत रोक लगाएं।

 

 

 

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