एआई तकनीक से गेहूं में लीफ रस्ट रोग की समय रहते होगी पहचान

एआई तकनीक से गेहूं में लीफ रस्ट रोग की समय रहते होगी पहचान

एआई तकनीक से गेहूं में लीफ रस्ट रोग की समय रहते पहचान करेगा कुवि का शोध, डॉ. संदीप गुप्ता को मिला 18 लाख का शोध अनुदान

कुरुक्षेत्र /न्यूज रिसोर्स /24 जुलाई 2026 /शशि अरोड़ा

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप गुप्ता को हरियाणा स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल द्वारा हरियाणा स्टेट रिसर्च फंड (एचएसआरएफ) के तहत 18 लाख रुपये का प्रतिष्ठित शोध अनुदान प्रदान किया गया है।

 

यह अनुदान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक से गेहूं में लीफ रस्ट रोग की समय रहते पहचान करने वाला मॉडल विकसित करने की शोध परियोजना के लिए स्वीकृत किया गया है। यह परियोजना किसानों की फसल को रोग से होने वाले नुकसान को कम करने तथा गेहूं उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।

इस उपलब्धि पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने डॉ. संदीप गुप्ता को बधाई देते हुए कहा कि यह शोध अनुदान विश्वविद्यालय की बढ़ती शोध क्षमता, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस परियोजना के निष्कर्ष कृषि, पर्यावरण और समाज के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे तथा किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पर्यावरण अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. परमेश कुमार ने कहा कि रिमोट सेंसिंग, जियोस्पेशियल तकनीक, इमेज प्रोसेसिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में डॉ. संदीप गुप्ता का कार्य संस्थान की उत्कृष्ट शोध परंपरा को नई दिशा दे रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह परियोजना प्रिसीजन एग्रीकल्चर और पर्यावरण अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देगी।

हरियाणा देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में शामिल है। ऐसे में यह परियोजना आधुनिक एआई तकनीक के माध्यम से गेहूं में लीफ रस्ट रोग की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर किसानों को समय रहते आवश्यक कदम उठाने में सहायता प्रदान करेगी। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादकता में वृद्धि होने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में प्रिसीजन एग्रीकल्चर को भी बढ़ावा मिलेगा।

डॉ. संदीप गुप्ता ने जर्मनी के अल्बर्ट-लुडविग्स विश्वविद्यालय से रिमोट सेंसिंग में पीएच.डी. की है। उनकी विशेषज्ञता रिमोट सेंसिंग, इमेज प्रोसेसिंग और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में है। उन्होंने आईआईटी कानपुर तथा टीयू वियना (ऑस्ट्रिया) के साथ भी शोध सहयोग स्थापित किया है।

वर्तमान में उनके निर्देशन में एआई आधारित गेहूं में लीफ रस्ट रोग की पहचान, वैश्विक वाइल्डफायर से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का अध्ययन, कुरुक्षेत्र के शहरी विस्तार का विश्लेषण तथा हरियाणा और अरुणाचल प्रदेश के वनों में हो रहे परिवर्तनों पर महत्वपूर्ण शोध कार्य चल रहे हैं।

डीन फैकल्टी आफ लाईफ साइंस प्रो. जसबीर सिंह ने कहा कि इस प्रकार की बाहरी वित्तपोषित शोध परियोजनाएं विश्वविद्यालय के शोध वातावरण को और अधिक सुदृढ़ बनाती हैं तथा विभिन्न विषयों के बीच अंतर्विषयक सहयोग को प्रोत्साहित करती हैं।

डॉ. संदीप गुप्ता ने इस उपलब्धि पर हरियाणा स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल, विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा, डीन सहित संस्थान के सभी शिक्षकों, कर्मचारियों तथा अपनी शोध टीम के प्रति सहयोग एवं प्रोत्साहन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपनी शोध टीम की प्रतिबद्धता और कठिन परिश्रम की भी सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

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