मनोहर लाल फिसड्डी   साबित हुए

www.atalhind.com26 June 20222 min read0 viewsराजनीति

मनोहर लाल फिसड्डी   साबित हुए

करनाल जिले में स्थानीय निकाय चुनाव में दो तिहाई सीटों पर भाजपा को झेलनी पड़ी हार

मुख्यमंत्री का जिला होने के बावजूद भाजपा नहीं फहरा पाई जीत का परचम


-राजकुमार अग्रवाल –

चंडीगढ़ भारतीय जनता पार्टी का चुनाव में बेशक बड़ी जीत के दावे कर रही है लेकिन हकीकत यह है कि 2019 के चुनाव के मुकाबले में उसके वोट बैंक में बड़ी “गिरावट” दर्ज की गई है। इसके अलावा सीटों की संख्या को लेकर भी बीजेपी को बड़ा “नुकसान” झेलना पड़ा है।
सबसे बड़ी बात है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का जादू दम “तोड़” रहा है और उनके “बलबूते” पर भाजपा जनता का समर्थन हासिल करने में “नाकाम” रही है।


चुनावी दौड़ और पकड़ के हिसाब से मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का प्रदर्शन बेहद “खराब” रहा है। मुख्यमंत्री जनता को लुभाने में नाकाम रहे हैं इसलिए करनाल जिले की चार नगर पालिकाओं में से तीन नगर पालिकाओं में भाजपा चारों खाने चित हो गई।
नीलोखेड़ी, निसिंग और असंध में भाजपा के चेयरमैन प्रत्याशी चुनावी दंगल में हार गए और घरौंडा में भी भाजपा का प्रत्याशी 31 वोटों से ही जीत हासिल कर पाया।
मुख्यमंत्री जब अपने ही गृह जिले में भाजपा को जीत दिलाने में “नाकाम” रहे हैं तो ऐसे में यह अंदाजा आसानी से लगा जा सकता कि बाकी हरियाणा में मुख्यमंत्री की लोकप्रियता का “ग्राफ” कहां पर खड़ा है।
यह हकीकत है कि शहरी वोटरों पर हमेशा से भाजपा का जनाधार मजबूत रहा है लेकिन वर्तमान स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा को जनता का वह समर्थन हासिल नहीं हुआ जिसकी उम्मीद की जा रही थी।
लगभग 15% वोटरों ने भाजपा का साथ छोड़ दिया। यह तो कांग्रेस के चुनाव नहीं लड़ने का फायदा bjp को मिल गया नहीं तो करनाल के चुनाव परिणाम बता रहे हैं कि बाकी प्रदेश में भी नजारा होता।
बात यह है कि मुख्यमंत्री लाल खट्टर वोट कैचर नेता के तौर पर 8 साल बाद भी अपने आप को स्थापित नहीं कर पाए है।
इसलिए उनके नाम पर भाजपा को वोट नहीं मिलते हैं। भाजपा को मिली सीटों के पीछे विधायकों और प्रत्याशियों के खुद के रसूख और जनाधार ही सहायक रहे हैं।
मुख्यमंत्री खट्टर की इमेज या पकड़ इतनी नहीं थे कि उसके बलबूते पर भाजपा स्थानीय निकाय चुनाव में जीत हासिल कर पाती।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की लोकप्रियता का गिरता हुआ ग्राफ भाजपा के लिए खतरे की घंटी बजने का काम कर गया है । अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर इस खराब परफॉरमेंस से किस तरह से उभरते हैं और अपनी छवि को सुधारते हुए किस तरह से हरियाणा की जनता के दिलों में अपने लिए बड़ी जगह बनाने का काम करते हैं।

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