नारायणगढ़ में नौकरी के नाम पर ठगी: खुद को महामंडलेश्वर बताने वाला गिरफ्तार

www.atalhind.com10 June 20263 min read0 viewsअम्बाला

लाखों रुपए और गहनों की ठगी के मामले में महामंडलेश्वर गिरफ्तार, पांच दिन के रिमांड पर

खुद को बताता था मानवाधिकार सुरक्षा संघ का संस्थापक

अम्बाला/नारायणगढ़//10 जून 2026 /अटल हिन्द ब्यूरो /पुरण सिंह 

सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर महिला से लाखों रुपए और गहनों की ठगी के करने के आरोप में पुलिस ने खुद को महामंडलेश्वर बताने वाले को गिरफ्तार किया है। उसे कोर्ट में पेश करने पर पांच दिन के रिमांड पर भेजा गया है।

कालाअंब की शिवालिक कॉलोनी निवासी सुनीता रानी ने नारायणगढ़ पुलिस को शिकायत दी थी कि वर्ष 2024 में उनकी महामंडलेश्वर योगी आनंद गिरी महाराज से जानकारी हुई। उसने खुद को मानवाधिकार सुरक्षा संघ का संस्थापक बताया।

उसने हरियाणा में संघ के विस्तार के लिए सुनीता को महिला विंग की अध्यक्ष बनाया। सुनीता ने बताया कि 21 दिसंबर 2025 को कालाअंब में एक रक्तदान शिविर में आनंद गिरी अपने सहयोगी मनीष मिश्रा के साथ पहुंचे।

आनंद गिरी ने उन्हें कहा कि उनका एक शिष्य सेंट्रल सेके्रटिएट में इंडिया गेट के पास बड़े पद है। आनंद गिरी ने कहा कि उन्होंने कई लोगों को सरकारी नौकरी लगवाया है और उसके बेटे को भी लगवा सकता है।

आनंद गिरी ने सुनीता के बेटे ऋषभ बंसल को भारत सरकार, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय में एएसओ के पद पर लगवाने के लिए दस लाख रुपए मांगे और कहा कि यदि नौकरी नहीं लगा तो वह दस के बीस लाख रुपए देंगे।

इसके बाद सुनीता ने उसी समय उसे 50 हजार रुपए दिए। उसके बाद खाते में पांच लाख रुपए दिए। आनंद गिरी ने कहा कि कुछ दिन बाद ऋषभ का ज्वाइनिंग लेटर आ जाएगा। काफी दिनों बाद आनंद गिरी ने उन्हें आम्रपाली गाजियाबाद में अपने फ्लैट पर बुलाया। जब वह वहां पहुंचे तो उन्हें लिफाफे में एक लेटर दिया गया और कहा कि वह खुद जाकर उसकी ज्वानिंग करवाएंगे।

ऑफर लेटर देकर बुलाया, फिर फोन बंद कर लिया
ऑफर लेटर पर 8 जनवरी 2026 की तिथि थी। तभी वहां बाबा के सहयोगी मनीष मिश्रा ने कुछ कागजों पर ऋषभ के हस्ताक्षर करवाए और कहा कि इनको किसी आईएएस, आईपीएस अधिकारी से अटेस्टेड कराना होगा।

उन्हें बताया गया किया 19 जनवरी को ज्वाइनिंग होगी, लेकिन तारीख निकलने के बाद सुनीता लगातार आनंद गिरी को फोन करती रही, पर उन्होंने जवाब नहीं दिया। इसके बाद फरवरी में उनके व्हाटसएप पर आनंद गिरी ने मैसेज किया किया ज्वानिंग के लिए अधिकारियों को बकाया पांच लाख भी देने होंगे।

सुनीता ने पांच लाख भी उनके खाते में डाल दिए। उसके बाद 10 मार्च को उन्हें मैैसेज आया कि दिल्ली जाए जाएं और ज्वानिंग हो जाएगी। जब वह दिल्ली के लिए निकले तो आनंद गिरी को फोन किया तो लेकिन उनका फोन बंद आया। उन्होंने मनीष मिश्रा को फोन किया तो उसने कहा कि वह नहीं नहीं जानते की आनंद गिरी कहां है।

पैसे और गहने वापिस मांगने पर धमकाया
सुनीता ने बताया कि किसी तरह वह बाबा के गाजियाबाद वाले फ्लैट पर पहुंचे तो वहां मनीष मिश्रा ने दरवाजा खोला और आनंद गिरी को मिलवाने से मना कर दिया। सुनीता ने किसी तरह अंदर जाकर आनंद गिरी से बात की तो उसने कहा कि ज्वानिंग के लिए अधिकारी पांच लाख और मांग रहे हैं।

जिस पर सुनीता ने उन्हें सोने की अंगूठी, चेन और बालियां पाच लाख के बदले दे दी। वह अपने बेटे को वहां छोडक़र चली आई, लेकिन उन्होंने ऋषभ की कहीं ज्वानिंग नहीं करवाई बल्कि उसे एक होटल में छोड़ गए।

ना तो उसके बेटे को नौकरी दिलाई और ना ही पैसे और गहने वापिस दिए बल्कि उल्टा उन्हें धमकाया गया। जांच अधिकारी नरेन्द्र यादव ने बताया कि सुनीता की शिकायत पर नारायणगढ़ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया और आरोपी महामंडलेश्वर आनंद गिरी को गिरफ्तार कर नारायणगढ़ कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे पांच दिन के रिमांड पर भेजा गया है। शिकायतकर्ता सुनीता की तरफ से एडवोकेट अंजू शर्मा पैरवी कर रही हैं।

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