पटौदी–जाटोली मंडी परिषद क्षेत्र में मानसून की पहली बरसात ने खोली व्यवस्था की पोल, जलभराव से जनता परेशान

पटौदी–जाटोली मंडी परिषद क्षेत्र में मानसून की पहली बरसात ने खोली व्यवस्था की पोल, जलभराव से जनता परेशान
अभी तो शुरुआत है आगे आगे देखिए होता है क्या
मामूली सी बरसात होते ही पटौदी जाटोली मंडी परिषद सीमा क्षेत्र में पानी ही पानी
बड़ा और खरा सवाल ड्रेनेज की सफाई क्या मानसून के बाद की जाएगी
बरसाती पानी निकासी के लिए नहीं है कोई भी ठोस व्यवस्था और इंतजाम
पटौदी / हेली मंडी/5 जुलाई 2026 /फतह सिंह उजाला 
 पटौदी और हेली मंडी पुराने नगर पालिका क्षेत्र तथा उनके साथ में लगता विभिन्न नौगांव को मिलाकर पटौदी जाटोली मंडी परिषद का गठन कर दिया गया। परिषद के चुनाव हुए चुनाव में उम्मीदवार दावेदार जो की अब पटौदी जाटोली मंडी परिषद हाउस के सम्मानित सदस्य अथवा पार्षद भी बन चुके, बिना भेदभाव समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया।
मानसून के आरंभ होते ही बरसाती पानी परिषद सीमा क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर जनप्रतिनिधियों के द्वारा किए गए वादों हिलोर लेते हुआ दिखाई दे रहा है। आम जनता के चुने हुए जनप्रतिनिधि मानसून की बरसात से अधिक परिषद के हाउस अथवा सदन में होने वाली बैठक में बरसते हुए दिखाई देते हैं।
परिषद का चुनाव लड़े सुशील कुमार लालू का कहना है चुनाव से पहले दिल खोल कर लोक लुभावन वायदे किए गए। लेकिन अब समय आ गया है जनप्रतिनिधि अपने वादों को पूरा भी करके दिखाएं।
जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मानसून के आरंभ होने से पहले ही विभिन्न विभागों और अधिकारियों की बैठक लेते हुए निर्देश देते हैं कि मानसून में जल भराव की शिकायतें अथवा समस्या आम जनता के सामने नहीं आनी चाहिए।
समय रहते बरसाती नालों की सफाई करवाई जाए। लेकिन जैसे ही मानसून में या बिना मानसून के भी आसमान से बरसात होती है। तो गर्मी में बेशक राहत मिल जाए ,लेकिन सड़क पर भरा हुआ पानी आम जनमानस के लिए गंभीर समस्या बनकर परेशानियां पैदा करता रहता है।
कहा तो यहां तक जा रहा है कि विभिन्न स्थानों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लाखों रुपए की लागत से स्थापित किए गए। उपयोगिता अभी आने वाले मानसून में होने वाली बरसात में साबित हो सकेगी? लेकिन मुख्य सड़क के किनारे बने हुए ड्रेनेज अथवा बरसाती नाले कथित रूप से अभी भी कीचड़ पॉलिथीन अन्य प्रकार के वेस्ट मटेरियल से भरे हुए बताए जाते हैं ।
स्थानीय स्तर पर प्रशासन के द्वारा मानसून के दौरान होने वाली बरसात के बरसाती पानी के भरने और विभिन्न कारणों से होने वाले वाटर लॉगिंग की समस्या के समाधान की कोई ठोस योजना रणनीति दिखाई नहीं दे रही है।
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