नारी शक्ति वंदन या दहेज की नई मांग? पर्ल चौधरी का बयान

www.atalhind.com19 April 20264 min read0 viewsगुरुग्राम
नारी शक्ति वंदन या दहेज की नई मांग? पर्ल चौधरी का बयान

 

नारी शक्ति वंदन” या शादी में फेरे से पहले दहेज की नई मांग ! – पर्ल चौधरी
 
भाजपा ने दुष्प्रचार किया विधानसभा-लोकसभा में  50 प्रतिशत सीटें बढ़ाई जा रही
 
131वां संविधान संशोधन विधेयक 2026, 50 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रावधान नहीं
 
भाजपा की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर सत्ता पर पकड़ मजबूती की कोशिश 
फतह सिंह उजाला
गरुग्राम। देश की जनता के सामने सच्चाई रखना बेहद जरूरी हो गया है। हाल ही में संसद में जो तीन विधेयक पेश किए गए— 131वां संविधान संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक 2026 और  केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026। इनमें कहीं भी “नारी शक्ति वंदन” या महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था।  । बावजूद कुछ मीडिया माध्यमों के जरिए सत्ता पक्ष भाजपा के द्वारा जी प्रचार किया गया कि विधानसभा और लोकसभा में 50 प्रतिशत सीट  बढ़ाई जा रही। जबकि इन विधेयकों में ऐसा कोई उल्लेख ही नहीं था। यह तीखी प्रतिक्रिया हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट  पर्ल चौधरी (Pearl Chaudhary Statement)के द्वारा व्यक्त की गई।
उन्होंने कहा भारतीय जनता पार्टी के इस धोखेबाज़ी भरे प्रयास को यदि एक उदाहरण से समझें, तो यह वैसा ही है जैसे शादी तय होने के बाद मंडप में दूल्हे पक्ष द्वारा दहेज की नई मांग रख दी जाए। सरकार ने भी कुछ ऐसा ही किया—महिला आरक्षण लागू करने के नाम पर संसद से यह मांग रखी कि डिलिमिटेशन (परिसीमन) की प्रक्रिया को संवैधानिक ढांचे से हटाकर अपने नियंत्रण में ले लिया जाए। यानी लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की गई। और यदि इसका विरोध किया जाए, तो विरोध करने वालों को “महिला आरक्षण का विरोधी” करार दिया जाए—यह सीधा-सीधा राजनीतिक दबाव और नैतिक ब्लैकमेल है।
गुरुग्राम नगर निगम में हो चुका आरक्षण का खेला
कांग्रेस नेत्री चौधरी (Pearl Chaudhary Statement)ने कहा अब सत्ता पक्ष भाजपा के डिलिमिटेशन के खेल को समझिए। देश में कई जगहों पर इस प्रक्रिया का राजनीतिक दुरुपयोग हुआ है, जिसकी चर्चा राष्ट्रीय स्तर के नेता भी कर चुके हैं। हरियाणा में गुरुग्राम नगर निगम इसका ताजा उदाहरण है। 2008 से अब तक दलित समाज को लगभग 19-20 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की परंपरा रही, जहाँ 35 पार्षदों में 6 सीटें आरक्षित थीं। लेकिन 2025 में भाजपा सरकार ने पार्षदों की संख्या बढ़ाकर 36 कर दी, और दलित समाज के लिए आरक्षित सीटों को घटाकर मात्र 3 कर दिया—यानी 50 प्रतिशत की कटौती। यह दलित विरोधी मानसिकता का स्पष्ट प्रमाण है।
सत्ता पक्ष की यह एक तरह की “शकुनि चाल” थी
कांग्रेस नेत्री श्रीमती चौधरी ने कहा सच्चाई यह है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 पहले ही संसद के दोनों सदनों द्वारा पूर्ण बहुमत से पारित किया जा चुका है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने 16, 17 और 18 अप्रैल के संसद सत्र में जो बिल लोकसभा में प्रस्तुत किए, उनका वास्तविक उद्देश्य महिला सशक्तिकरण नहीं बल्कि अपनी सत्ता को और मजबूत करना था। यह एक तरह की “शकुनि चाल” थी, जिसे देश की जागरूक जनता ने समय रहते समझ लिया और परिणामस्वरूप यह प्रयास लोकसभा में सफल नहीं हो सका। इससे हमारे संविधान और लोकतंत्र की अस्मिता सुरक्षित रही।
भाजपा के वादे केवल चुनावी जुमले बाजी
पर्ल चौधरी, हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष ने कहा की, मैं अपने आप को तुलसीदास जी के रामचरितमानस में वर्णित उस “शूद्र नारी” की प्रतीक मानती हूँ, जो आज भारत के संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों के कारण शिक्षित हो पाई है। बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था— “शिक्षा शेरनी का वह दूध है, जो पिएगा वह दहाड़ेगा।” आज वही शिक्षा हमें सच और झूठ में फर्क करना सिखाती है। हरियाणा में भी भाजपा की कथनी और करनी का फर्क साफ दिखाई देता है। 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में हरियाणा की एक करोड़ महिलाओं से वादा किया था कि सरकार बनते ही “लाडो लक्ष्मी योजना” के तहत हर महिला को 2100 प्रतिमाह दिया जाएगा। लेकिन आज स्थिति यह है कि कड़े शर्तों और कटौती के कारण यह लाभ केवल लगभग 8 लाख महिलाओं तक ही सीमित रह गया है। इससे स्पष्ट होता है कि पर्ल चौधरी
भाजपा महिलाओं के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने वाली पार्टी
प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष पर्ल चौधरी ने कहा
इन सभी तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि भारतीय जनता पार्टी महिलाओं के अधिकारों की सच्ची हितैषी नहीं, बल्कि उनके नाम पर राजनीतिक लाभ लेने वाली पार्टी है। महिला आरक्षण के मुद्दे को भी भाजपा ने एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश की है। आज जरूरत है कि देश की महिलाएं और समाज का हर वर्ग इस सच्चाई को समझे और ऐसे भ्रामक प्रचार से सतर्क रहे।
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