तोशाम में किसान-खेत मजदूर संगठन की बैठक आंदोलन खड़ा करने का ऐलान

www.atalhind.com14 May 20264 min read0 viewsभिवानी
तोशाम में किसान-खेत मजदूर संगठन की बैठक आंदोलन खड़ा करने का ऐलान

किसान व खेत मजदूरों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर जोरदार आवाज बुलंद करने का आह्वान

तोशाम,/ 14 मई,/विष्णु दत्त शास्त्री

किसान-खेत मजदूरों व ग्रामीणों के ज्वलंत मुद्दों को लेकर वीरवार को तोशाम के पंचायत भवन में ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन (एआईकेकेएमएस) की भिवानी जिला स्तरीय कार्यकर्ता बैठक आयोजित हुई।
जिसकी अध्यक्षता संगठन के जिला अध्यक्ष रोहतास सिंह ने की। बैठक में संगठन के अखिल भारतीय अध्यक्ष सत्यवान, राज्य में किसान संगठन का काम देख रहे राजेन्द्र सिंह और भिवानी जिले में संगठन के काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे रामफल सुहाग भी मौजूद थे। बैठक का संचालन एआईकेकेएमएस के जिला सचिव बस्ती राम ने किया।
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि सरकार की पूंजीपति परस्त और किसान-मजदूर विरोधी नीतियों से लोगों का जीना दूभर हो गया है। खेत-खलिहानों में कड़ी मेहनत करने के बाद भी उनके हालात दयनीय हैं। मंहगाई-बेरोजगारी और कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। बिजली के रेट अनाप-शनाप बढ़ाये जा रहे हैं। पीने के पानी व सिंचाई की समस्या का समाधान नहीं हुआ है। एमएसपी यानी लागत से डेढ़ गुना समर्थन मूल्य पर फसलों की सरकारी खरीद का कानून नहीं है।
खाद, बीज, कीटनाशक, खेती के औजार महंगे हैं, जिससे खेती घाटे का सौदा होती जा रही है। बाढ़ से फसल खराबे और मकानों के नुकसान का मुआवजा नहीं दिया जाता। निजीकरण ने शिक्षा, स्वास्थ्य और हरियाणा रोडवेज का बेड़ा गर्ग कर रखा है। प्राइवेट स्कूलों, अस्पतालों और बसों के मालिक मनमानी कर रहे है। फैमिली आईडी लोगों के लिए जी का जंजाल बना दी है। बिजली महंगी है। स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। कृषि सब्सिडी खत्म की जा रही है। इससे बिजली बहुत महंगी हो जायेगी
अमेरिका से किया गया व्यापार समझौता किसानों को बर्बाद करने वाला है। भारत सरकार ने बड़े पूंजीपतियों और व्यापारियों का स्वार्थ साधने के लिए किसान के हितों की बलि चढ़ा दी है। अमेरिकी सामानों पर टैरिफ जीरो कर दिया। बीज बिल किसान-विरोधी है।   नवम्बर 2024 में पोषित कृषि मार्केटिंग की नीति का दस्तावेज प्रबल विरोध के बावजूद अभी तक वापस नहीं लिया गया है। यदि इसे लागू किया गया, तो यह बड़ा खतरनाक साबित होगा।
केन्द्र सरकार कृषि में प्राइवेट कम्पनियों की घुसपैठ को आसान बना रही है। लैंड पूलिंग जैसी किसान-विरोधी नीतियां उपजाऊ कृषि भूमि हड़पकर बड़े-बड़े पूंजीपतियों को देने के मंसूबे से थोपी जा रही हैं। जीवनदायिनी अरावली को भी पूंजीपतियों के हित में दिये जाने की साजिशें चल रही हैं।
देहात में भूमिहीन खेत मजदूरों व अन्य ग्रामीण गरीबों को रोजगार नहीं है। मनरेगा को हटाकर जिस ‘विबीग्रामजी’ कानून का सरकार इतना ढिंढोरा पीट रही है, जबकि केन्द्र सरकार पहले इसमें 90 प्रतिशत धन खर्च करती थी, जो घटाकर अब 60 प्रतिशत कर दिया है। इसमें से भी बड़ी रकम वह विज्ञापन-प्रचार पर खर्च कर रही है। नया कानून ज्यादा केन्द्रीकृत है और अधिकार-आधारित रोजगार की कानूनी गारंटी नहीं देता है।
किसान-मजदूर परिवारों के बेटे बेटियों को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार व वतन नहीं है। खुद सरकार उन्हें मामूली वेतन पर कच्चे नौकर लगा रही है। सरकारी स्कूल बन्द किये जा रहे हैं और विज्ञान के मूल सार को पढ़ाई की किताबों में हटाया जा रहा है ताकि नई पीढ़ी में तार्किक सोच-समझ पैदा न हो।
नशाखोरी, अश्लीलता, विकृत सैक्स प्रवृत्ति, कुसंस्कृति, गैंगरेप, बलात्कार, हत्या, लूटपाट, बढ़ते अपराध ने समाज का अमन-चैन छीन लिया है। वोट बैंक की निकृष्ट राजनीति के लिए लोगों में जात-पात, साम्प्रदायिक क्लेश, धार्मिक अंधविश्वास, घोर रूढ़िवाद फैलाकर समाज के ताने-बाने व आपसी एकता व भाईचारे को तहस-नहस किया जा रहा है। लोग बेहद त्रस्त हैं। सरकार सिर्फ तमाशा देख रही है। उसका सारा जोर सिर्फ बड़ी पूंजी के मालिकों की तिजोरियां भरने पर है।
किसान नेताओं ने कहा कि इन सब समस्याओं के समाधान केवल आन्दोलन के रास्ते ही हो सकता है। अपने अधिकारों व मांगों को पूरा कराने के लिए जनआंदोलन ही एकमात्र विकल्प है। उन्होंने सरकार के रवैये को देखते हुए प्रदेश में फिलहाल एक बड़ा आंदोलन खड़ा करने की जरूरत पर बल दिया। ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन अपने स्तर पर और संयुक्त किसान मोर्चा के साथ मिलकर साझे तौर पर भी बड़े किसान आंदोलन गठित करने के काम में जी-जान से जुटा हुआ है।
  खेती-किसानी व जनजीवन के असली सवालों को लेकर गांव-गांव में जोरदार जन-जागरण अभियान चलाने और ग्राम सभाएं, नुक्कड़ सभाएं और बड़े गांवों में महापंचायतें आयोजित कर लोगों की आवाज को बुलन्द करने का आह्वान किया। हरियाणा के किसानों, खेत मजदूरों समेत तमाम शोषित-पीड़ित जनता से 25 अक्टूबर को रोहतक में होने वाली किसान-मजदूर छात्र नौजवान एवं महिला महापंचायत को सफल बनाने की पुरजोर अपील की और संघर्ष कमेटी भी बनायी गई।
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