पश्चिम बंगाल की नई वोटर लिस्ट से 91 लाख नाम बाहर

अजय कुमार,
आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर साफ होती है। 60 लाख संदिग्ध मतदाता थे। जांच में 27 लाख कटे। बाकी 91 लाख में मृतक नाम प्रमुख हैं। आयोग ने कहा कि कई नाम ऐसे थे जो दशकों पुराने हैं। मालिक मर चुके, फिर भी लिस्ट में दर्ज। कुछ नाम डुप्लिकेट थे। एक ही व्यक्ति का कई जगह नाम। कुछ अवैध प्रवासियों के। जिले दर जिले सूची जारी हुई। कोलकाता में सबसे ज्यादा कटौती। उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जैसे सीमावर्ती जिलों में संख्या डरावनी। वहां घुसपैठ का खतरा हमेशा रहता है। आयोग ने दावा किया कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष रही, राजनीतिक दबाव से मुक्त। हर नाम हटाने से पहले सत्यापन हुआ। जनप्रतिनिधियों को सूचना दी गई। फिर भी विपक्ष चिल्ला रहा है। तृणमूल का कहना है कि यह भाजपा की साजिश है। वोट बैंक कम करने का प्रयास। लेकिन आयोग के पास प्रमाण हैं। मृत्यु प्रमाण पत्र आधारित हटाए गए नाम। आधार कार्ड से जुटाई गई जानकारी। यह सफाई लोकतंत्र के लिए जरूरी थी। इस कदम के राजनीतिक निहितार्थ गहरे हैं। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिये मतदान होना है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल का वर्चस्व है। ममता बनर्जी की सरकार पर घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप। भाजपा इसे बड़ा मुद्दा बनाएगी। 91 लाख नाम कटने से तृणमूल का वोट बैंक प्रभावित होगा, खासकर मुस्लिम बहुल इलाकों में। आयोग का यह फैसला भाजपा के पक्ष में जाता दिखता है।
यह प्रक्रिया पूरे देश के लिए मिसाल बने। अन्य राज्यों में भी ऐसा हो। उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों में फर्जी वोटरों की भरमार है। वहां भी सफाई जरूरी। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश राष्ट्रीय स्तर पर लागू हो। बहरहाल, चुनाव आयोग की यह कार्रवाई सराहनीय है। 91 लाख नाम हटाकर उसने विश्वास जीता। लेकिन पारदर्शिता बनाए रखनी होगी। हर कटे नाम का कारण सार्वजनिक करें। राजनीतिकरण न होने दें। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आगे बढ़ें। पश्चिम बंगाल की जनता को लाभ मिलेगा। स्वच्छ वोटर लिस्ट से सच्चा जनादेश आएगा। लोकतंत्र मजबूत होगा। ममता बनर्जी सरकार को जवाब देना होगा। घुसपैठ पर स्पष्टीकरण दें। भाजपा को सतर्क रहना होगा कि यह राजनीतिक हथियार न बने। कुल मिलाकर यह सकारात्मक कदम है। वोट की अहमियत बढ़ेगी। फर्जी वोटरों का राज खत्म होगा। आने वाले चुनाव रोचक होंगे। सच्चाई की जीत होगी। आयोग का यह कदम भारतीय लोकतंत्र के लिए मील का पत्थर है। आयोग ने साबित किया कि वह निष्पक्ष है। सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक कर्तव्य निभाया। अब बारी जनता की। जागरूक बनें। अपना नाम चेक करें। वैध वोट दें। पश्चिम बंगाल से सबक लें। स्वच्छ मतदाता सूची ही सच्चे लोकतंत्र की गारंटी।